मां तू क्यों कभी थकती नहीं?
मां तू क्यों कभी थकती नहीं? दिन भर काम करने के बाद भी मां कैसे फिर भी तू मुस्कुराती और सारा माहौल उर्जा से भर देती मां तू क्यों कभी थकती नहीं? हंसते-हंसते त्याग करते हुए कभी बच्चों के लिए,कभी पति के लिए, कभी मायके के लिए, कभी ससुराल के लिए तू एक उजाला है अंधेरे में जब कभी हो जाते हैं मायूस तो झुलसते दिलों में कोयल सी बोली है तू मां मां तू क्यों कभी थकती नहीं? सबकी चिंता करते हुए पूरे परिवार के आंसू अपनी आंखों में समा लेने में हमारी खुशियों में शामिल होकर अपने ग़म भुलाने में मां तू क्यों कभी थकती नहीं? हमारे डगमगाते क़दमों को सम्हालने में हमें सहारा देने में हमारे लिए लड़ते हुए मां तू क्यों कभी थकती नहीं? हमें उठाते, बढ़ाते हमारी सराहना करते हुए हमें कोहिनूर समझते हुए हमारी परवरिश करते हुए मां तू क्यों कभी थकती नहीं?